इस जीवन को समझने का प्रयास कर लिया
समस्याओं और समाधानों को एक सार कर लिया
जब लगा की समस्याएं अनंत हैं, तब लगा की यह जीवन का अंत है
असमयिकता से अंतर्मन थर्रा गया
फिर एक विचार ने उसमें हर्ष भर दिया
जब लगा की किसी भी बात का अर्थ नहीं है
जब लगा सपनें और वास्तविकता सब वर्थ ही हैं
तभी एक शक्ति पुंज से आँखें चौंधिया गई
लगा हर पल सार्थक हर श्वास सत्य है
जिससे जितना दूर भागे उसे उतना ही पास पाया है
इन्हीं समस्याओं ने तो हमें अपन आप से मिलाया है
अपनी हर नासमझी को समझ और समझ को नासमझी हमी ने तो बनाया है
जान के भी अनजान हैं, पर अनजाने को जाना है
हर बार जब हम गिरे और चोटें खायीं
हम रोये, बोले इतना बुरा ! हम ही क्यूं
पर जब दृष्टि पर पड़ी धुंध हटी
हम बोले, हे प्रभु ! कम से कम हमपे तो यह गाज नहीं पड़ी
No comments:
Post a Comment