Thursday, August 27, 2009

यादें

याद है अपने छोटे से शेहेर की छोटी-छोटी सी जिंदगियां
वो न कटता सा समय, छोटे मासूम से सपने, वो बेफिक्रियाँ
नुक्कडों और पान की दुकानों पर देश विदेश की बनती बिगड़ती नीतियाँ
आज इस बड़े शेहेर की बड़ी चौडी सड़क के इस पार हैं हम, न जाने हमारी जिंदगी है कहाँ ?

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